Shraddha Murder Case: रिश्तों में ‘श्रद्धा’ तलाशने का समय, समझना होगा संबंधों का मनोविज्ञान

दिल्ली के मेहरौली में मई में घटी एक घटना का जब हाल में पर्दाफाश हुआ तो लोग सन्न रह गए। अधिकांश परिवारों में लोग बेटियों व उनके पुरुष मित्रों के प्रति सतर्कता बरतने लगे हैं। दरअसल आज की पीढ़ी ने अपने परिवार से, अपनों से, स्वजन के लिए एक लकीर खींच दी है, जिसके आगे हस्तक्षेप उन्हें बरदाश्त नहीं होता। विशेषकर रिश्तों के प्रति आज की पीढ़ी का बढ़ता अलगाव और नासमझी अपने भविष्य को क्या देगी, इसकी परिकल्पना बहुत विचलित करती है। इन्हें संविधान, अधिकार, कानून की गहरी समझ नहीं है, परंतु परिवार को यह कहने से नहीं चूकते कि उन्हें बोलने और स् तंत्र रूप से जीने का अधिकार है। बाकायदा उम्र का हवाला होता है।

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