विश्वभाषा बनने के लिए मानकीकरण आवश्यक : तेजेन्द्र शर्मा

जब तक हिंदी को एक मानक स्वरूप नहीं देंगे तब तक उसको वैश्विक भाषा के तौर पर स्थापित करना कठिन होगा। आज अगर कोई व्यक्ति आस्ट्रेलिया में, न्यूजीलैंड में, ब्रिटेन में या अमेरिका में अंग्रेजी लिखता है तो भले ही शब्दों की स्पेलिंग अलग हो लेकिन अर्थ समान होता है। हिंदी में ऐसी स्थिति नहीं है। कोई ऐसी हिंदी लिखता है जिसमें ब्रज के शब्द अधिक होते हैं, किसी में अवधी के तो कोई अन्य आंचलिक शब्दों से भरपूर भाषा लिखता है। आंचलिक शब्दों का उपयोग हो लेकिन उस तरह के शब्दों का उपयोग हो जिसका अर्थ एक होता हो। विश्वभाषा बनने के लिए मानकीकरण बहुत आवश्यक है। ये कहना है लंदन के साहित्यकार तेजेन्द्र शर्मा का जो दैनिक जागरण के मंच हिंदी हैं हम पर अपनी बात रख रहे थे।

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