वित्तीय नियोजन: वृद्धावस्था में धन की कमी का सामना करना पड़ता है अधिकांश लोगों को

सामान्य तौर पर सेवा से अवकाश प्राप्ति के पश्चात का जीवन व्यक्ति बिना किसी बंधन के जीने की चाहत रखता है। परंतु यह उतना आसान नहीं होता जितना वह सोचता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उसकी आमदनी का माध्यम लगभग समाप्त हो जाता है। बुजुर्ग अवस्था में जीवन में आने वाली समस्याओं का हल करने के लिए पर्याप्त रकम होना आवश्यक है। ऐसे में यदि उसने अपने सक्रिय जीवन के दौरान समुचित धन का प्रबंधन कर लिया हो, तो उसे अधिक मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि व्यक्ति की कमाई के वर्षों में जितनी अधिक रिटायरमेंट बचत जमा होगी, अवकाश प्राप्ति के बाद का उसका जीवन उतना ही आसान होगा। लगभग 60 साल की उम्र में रिटायर होने तक औसतन लगभग 35 साल का करियर होता है।

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