बजट में कोरोना से निपटने की तैयारियों के साथ इससे हुए नुकसान से लोगों को उबारने का करें उपाय

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण द्वारा केंद्रीय बजट पेश करने में अब कुछ सप्ताह बचे हैं। इस वक्त अर्थव्यवस्था की दशा कुछ मिलीजुली-सी है। जहां सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक उछाल आया है, वहीं निजी उपभोग का हिस्सा पूर्व कोविड-19 महामारी की तुलना में अभी भी तीन प्रतिशत कम है। इसी तरह उपभोक्ता विश्वास सूचकांक में बेहतरी के बावजूद उपभोक्ताओं का भरोसा डांवाडोल है। वर्ष 2020 में आई इस महामारी की पहली लहर की चपेट में ध्वस्त हो गए रोजगार और नतीजतन फैल गई गरीबी और कर्ज से हम पूरी तरह निकल भी नहीं पाए थे कि दूसरी लहर की विभीषिका ने 2021 में अमूमन सब कुछ मटियामेट कर दिया। पहली लहर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अधिक प्रभावित हुआ था। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि आम बजट में न केवल महामारी की तीसरी लहर से निपटने की सारी तैयारियों, बल्कि इसकी पहली दो लहरों की आर्थिक मार का जायजा लेकर उसके निदान के सभी संभव उपायों को प्राथमिकता दी जाए।

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