Yasin Malik Case: जम्मू-कश्मीर को भारत से जबरदस्ती अलग करना चाहता था यासीन मलिक, सजा सुनाने के दौरान कोर्ट की टिप्पणी

। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यासीन मलिक को गंभीर आपराधिक प्रकृति के मामलों के लिए दोषी ठहराया गया है।

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जानलेवा बन रही इस आग को कृपया हवा न दीजिए, घटनाएं रोकने के साथ वन कर्मियों को प्रशिक्षित करने की भी जरूरत

जंगल की आग को बुझाने में 90 प्रतिशत झुलस चुके वनरक्षक राजेश कुमार बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। ऊना जिले के बंगाणा क्षेत्र में वह अपना कर्तव्य निभा रहे थे। पीछे पत्नी और दो बच्चे हैं। एक वनरक्षक और मीलों लंबा वनक्षेत्र। रिमोट सेंसिंग तकनीक का शुक्रिया कि उधर आग लगी, इधर भारतीय वन सर्वेक्षण का संदेश आ जाता है कि अमुक स्थान पर आग लगी है। फायरवाचर भी होते हैं और यह पता चल भी जाए कि यह धुआं सा कहां से उठता है तो वह किन औजारों के साथ उसे बुझा लेगा? राहत इस बात की है कि विभागीय मंत्री उसे बलिदानी मानते हैं। वह न केवल राजकीय सम्मान के साथ किए गए राजेश कुमार के अंतिम संस्कार में शामिल हुए, अपितु उन्होंने यह भी कहा कि राजेश को बलिदानी घोषित करने की बात वह मंत्रिमंडल की बैठक में रखेंगे।

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पंजाब की सियासत में भांजों ने डुबो दी मामाओं की नैया, पूर्व सीएम चरणजीत चन्नी सहित यह नेता बने शिकार

गुरप्रेम लहरी, बठिंडा। महाभारत में मामा शकुनी का प्यार भांजे दुर्योधन पर भारी पड़ा था, लेकिन पंजाब की सियासत में भांजों ने मामाओं की लुटिया डुबो दी। मंगलवार को भ्रष्टाचार में गिरफ्तार किए गए पूर्व सेहत मंत्री डा. विजय सिंगला की नैया डुबोने में उनके भांजे प्रदीप बंसल का अहम योगदान रहा है।

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वाराणसी में सड़क पर कूड़ा फेंकने वालों पर लगा जुर्माना, सीसीटीवी की गवाही पर आठ लोगों पर कार्रवाई

स्‍मार्ट सिटी वाराणसी में अब शहर में अपराध पर ही लगाम नहीं कसी जा रही है बल्कि स्‍मार्ट सिटी के कांसेप्‍ट में शहर को गंदा करने वाले भी चिन्हित किए जा रहे हैं। अब शहर को गंदा करने वालों पर भी सख्‍ती की जा रही है। अब शहर को गंदा करने वाले भी कार्रवाई के जद में आ रहे हैं और सुधार न होने पर उनपर आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर पांच सौ रुपये जुर्माना की कार्रवाई की गई है लेकिन सुधार नहीं हुआ तो आगे और भी सख्‍त कार्रवाई की जाएगी। वहीं अब शहर में कूड़ा कचरे वाले को न देकर बाहर फेंकने वालों पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

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Gyanvapi Masjid Case : ज्ञानवापी मस्जिद मामला सुनवाई योग्य है या नहीं? अब 30 मई को होगी सुनवाई

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में अदालत सुनवाई कर सकती है या नहीं इस मामले में वर्शिप एक्‍ट 1991 को लेकर जिला जज की अदालत में प्रकरण की पोषणीयता को लेकर अदालत पर सुनवाई होनी है। संभव है इस मामले को लेकर अदालत किसी निर्णय पर भी पहुंच जाए। इस लिहाज से वाराणसी ही नहीं बल्कि देश के इस चर्चित मामले में केस को लेकर लोगों की निगाह जिला जज की अदालत पर लगी हुई है। वहीं लगभग दो घंटे तक सुनवाई के बाद ज्ञानवापी केस में गुरुवार की सुनवाई चार बजे खत्म हो गई। वहीं जिला जज की अदालत ने अब इस मामले में 30 मई, सोमवार को अगली सुनवाई की तिथि दी है।

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पूर्वांचल के गौरजीत आम की पूरे देश में धूम, स्‍वाद व महक ऐसी क‍ि हर कोई ख‍िंचा चला आए

फलों के राजा आम ने बाजार में दस्तक दे दी है। तरह-तरह की प्रजातियों के आम ने दुकानों से लेकर ठेलों पर अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है। पूर्वांचल की बात करें तो अभी यहां देश के अन्य हिस्सों की पहचान रखने वाले आम ही बाजार में दिख रहे हैं। ऐसे में लोग आम खरीद तो रहे हैं लेकिन यह पूछना नहीं भूल रहे कि भाई! गौरजीत बाजार में कब आ रहा है? कबतक खाने को मिलेगा? यह महज क्षेत्रीयता की बात नहीं है। ऐसा इसलिए भी है कि देश में भले ही सैकड़ों प्रजाति के आम हों, गौरजीत की बात ही निराली है। अनूठा स्वाद, अजब सी मिठास और उसे चूस-चूस कर खाने का अंदाज। भला कौन नहीं उसे खोजेगा।

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इतिहासकार प्रो इरफान हबीब ने कहा : यह सही है कि कुतुबमीनार परिसर में 28 मंदिरों के अवशेष मिल चुके हैं

भारतीय इतिहास के जिस किरदार पर आज सबसे अधिक अंगुली उठ रही है, वह है औरंगजेब। उसके शासनकाल में मंदिरों को ध्वस्त करने का पूरा इतिहास भरा पड़ा है। उसने मथुरा और काशी के दो मंदिरों को ध्वस्त किया था। कुतुबमीनार परिसर में भी 28 मंदिरों के अवशेष मिल चुके हैं। प्रख्यात इतिहासकार और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एमरेटस प्रो. इरफान हबीब से दैनिक जागरण, अलीगढ़ के डिप्टी चीफ रिपोर्टर संतोष शर्मा ने मंदिर-मस्जिद के ताजा विवादों पर लंबी बात की। पेश हैं प्रमुख अंश...

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Real Lal Qila History: मुगल सम्राट शाहजहां ने नहीं बनवाया था दिल्ली का पहला लालकिला

। अगर आप से पूछें कि लालकिला कहां है? तो आप का जवाब शायद यही होगा कि लालकिला चांदनी चौक के सामने बना है, जिसे शाहजहां ने 1648 में बनवाया था, अगर ऐसा सोच रहे हैं तो आपका यह जवाब बिल्कुल गलत है। दरअसल, दिल्ली में इससे पहले भी एक लालकिला था जो शाहजहां के लालकिला से करीब 600 साल पहले बना था। इसका नाम था लालकोट, लेकिन इसे लालकिला के नाम से जाना जाता था।

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कोई अफसर हाथ में मोबाइल लिए और कान में ईयर फोन लगाए दिखे तो समझो वो मार्निंग वाक पर नहीं बल्‍कि ड्यूटी पर हैं

शासन की सख्ती इसे कहते हैं। "शर्मा जी' ने जबसे नगर विकास की कमान संभाली है, निकायों की दशा और दिशा बदल गई है। ड्यूटी क्या होती है, कैसे होती है, अफसर सीख गए हैं। भोर होते ही ये सड़क पर नजर आते हैं। "शर्मा जी' ने पांच से आठ बजे तक नगर भ्रमण का जो समय दिया है, उस बीच अफसर हाथ में मोबाइल और कान में ईयर फोन लगाए किसी सड़क पर व्यवस्थाओं का जायजा लेते दिख जाएंगे। इन्हें देखकर ये न समझिए कि वे मार्निंग वाक पर हैं। पूछेंगे भी तो कुछ बताएंगे नहीं। सिर्फ इतना ही कहेंगे कि ड्यूटी पर हैं। इसकी वजह भी है, उस बीच अफसर नगर विकास से सीधे वीडियो कांफ्रेंसिंग पर होेते हैं। कांफ्रेंसिंग में कभी सचिव होते हैं, कभी प्रमुख सचिव, तो कभी-कभी "शर्मा जी' खुद होते हैं। वीडियो के जरिए लखनऊ से मौका मुआयना भी कर लिया जाता है।

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Modi Government 8 Years: मोदी सरकार के सक्षम नेतृत्व और सुशासन के आठ साल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई, 2014 को जब पहली बार केंद्र की सत्ता संभाली थी तब देश निराशा के वातावरण से गुजर रहा था। भ्रष्टाचार चरम पर था। सामान्य जनमानस के मन में यह भाव था कि अब इस देश का कुछ नहीं हो सकता। आज यह गर्व की बात है कि मोदी सरकार में बीते आठ वर्षों में एक भी घोटाला नहीं हुआ। यह इसलिए संभव हो पाया, क्योंकि नरेन्द्र मोदी ने संसद को लोकतंत्र का मंदिर माना और देश की देवतुल्य 135 करोड़ जनता के सामने प्रण लिया कि 'न खाऊंगा न खाने दूंगा।' मोदी सरकार के सामने विश्व गुरु भारत का लक्ष्य है। यह लक्ष्य जनभागीदारी से ही पूर्ण होगा। अब देश के सामान्य नागरिक की बुनियादी जरूरत सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान नहीं हो सकती। 21वीं सदी में इन सबके अलावा कनेक्टिविटी चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, चिकित्सा सुविधा चाहिए, पीने का स्वच्छ जल चाहिए, बिजली चाहिए, इंटरनेट चाहिए, शौचालय चाहिए, सुरक्षा चाहिए, सम्मान चाहिए और विकास में भागीदार बनने के नए अवसर चाहिए। इसी लक्ष्य को पाने के लिए 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के सोच को केंद्र में रखकर मोदी सरकार ने अपनी यात्रा की शुरुआत की।

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