काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्णिम शिखर की लकड़ी से बनी माडल की मांग बढ़ी, शिव परिवार और नंदी किए जा रहे पसंद

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ धाम के शिखर की स्वर्मिण आभा से बनारस का जीआइ उत्पाद लकड़ी का खिलौना उद्योग चमक उठा है। काशी विश्वनाथ धाम के स्वर्ण मंडित शिखर के मॉडल की मांग बढ़ गई है। घरों में रखने और उपहार स्वरुप देने के लिए श्री काशी विश्वनाथ धाम का मॉडल श्रद्धालुओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।

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Hambantota Port: श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट पर शोध के बहाने रणनीति देखने पहुंचा चीनी पोत बना भारत की चिंता

श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट

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Raksha Bandhan Muhurta 2022 : गुरुवार रात 8.30 बजे से लेकर 12 अगस्‍त को पूरे दिन रक्षा बंधन का योग

सनातन धर्मावलंबियों के प्रमुख त्योहारों में एक रक्षा बंधन सावन पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार तिथियों के फेर से सावन पूर्णिमा दो दिन मिल रही है। पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 9.35 बजे लग रही है जो 12 अगस्त को सुबह 7.17 बजे तक रहेगी। इस बीच 11 अगस्त को 9.35 बजे भद्रा लग जा रहा है जो रात 8.30 बजे तक रहेगा। ऐसे में 11 अगस्त की रात 8.30 बजे के बाद राखी बांधी जा सकेगी। वहीं, 12 अगस्त की सुबह 5.30 बजे के बाद 7.17 बजे तक पूर्णिमा काल में राखी बांधने का विशेष योग है। हालांकि इस दिन सुबह 5.30 बजे से संपूर्ण दिन पर्यंत रक्षा सूत्र बंधन शुभ रहेगा।

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स्वाधीनता के समय थे मात्र चार मेडिकल कालेज, स्वास्थ्य क्षेत्र में निरंतर हो रही प्रगति

स्वाधीनता के बाद बीते 75 वर्षों में देश ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन स्वास्थ्य के मामले में हमारी तरक्की खास है। कोविड-19 महामारी के दौर में वैक्सीन के लिए दुनिया हमारी तरफ देख रही थी और हमने उनकी अपेक्षाओं को यथासंभव पूरा किया, जिसकी विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित दुनिया के तमाम देशों ने सराहना की। बीते साढ़े सात दशक में हमने क्या हासिल किया और आगे क्या लक्ष्य होगा, स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के मौके पर विचार आवश्यक है।

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स्वावलंबन के सारथी : आज दुनिया के तमाम देशों में जालंधर के खेल उत्पादों का बज रहा है डंका

देश विभाजन का दर्द सीने में लेकर 75 साल पहले पाकिस्तान के स्यालकोट से जालंधर आए चुनिंदा परिवारों ने देश में खेल उद्योग की स्थापना की। ये परिवार आज बहुत से देशों में खेल उत्पादों की सप्लाई कर रहे हैं। जालंधर में 127 तरह के खेल उत्पाद तैयार करने वाले इन परिवारों ने पाकिस्तान ही नहीं चीन व ताइवान सहित तमाम यूरोपीय देशों को भी अपने पुरुषार्थ के दम पर पीछे छोड़ दिया है। विभाजन के बाद बेघर होकर जालंधर में स्थापित होने वाले ज्यादातर खेल कारोबारी व उद्योगपति खाली हाथ ही आए थे। किसी के पास रहने को छत नहीं थी तो किसी के पास दो वक्त की रोटी की व्यवस्था नहीं थी, लेकिन इन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

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ये हैं स्‍वावलंबन के सारथी, जिंदगी के मैदान में संकल्पशक्ति से जीती बाजी, खेल उद्योग के बने बादशाह

जालंधर, [मनोज त्रिपाठी]। स्‍वावलंबन के सारथी: देश विभाजन का दर्द सीने में लेकर 75 साल पहले पाकिस्तान के स्यालकोट से जालंधर आए चुनिंदा परिवारों ने देश में खेल उद्योग की स्थापना की। ये परिवार आज बहुत से देशों में खेल उत्पादों की सप्लाई कर रहे हैं। जालंधर में 127 तरह के खेल उत्पाद तैयार करने वाले इन परिवारों ने पाकिस्तान ही नहीं चीन व ताइवान सहित तमाम यूरोपीय देशों को भी अपने पुरुषार्थ के दम पर पीछे छोड़ दिया है।

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कार्बन की कीमत का निर्धारण ही भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों को पाने की मूल रणनीति होगी

ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 में संशोधन के लिए विधेयक लोकसभा से पारित हो गया है। इसका उद्देश्य भारत के लिए एक कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम को तैयार करना है। इसे कार्बन इमीशन ट्रेडिंग स्कीम (ईटीएस) भी कहते हैं। निश्चित तौर पर यह भारत की जलवायु नीति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस संशोधन विधेयक के विभिन्न प्रभावों को समझने के लिए ईटीएस के कुछ प्रमुख बिंदुओं को जानना जरूरी है। सबसे पहले कार्बन की कीमत निर्धारण के विचार पर आते हैं। अगर यह कहें कि जीवाश्म ईंधन (कोयला, डीजल इत्यादि) के इस्तेमाल से पांच टन कार्बन उत्सर्जन होता है और कार्बन की कीमत 100 रुपये प्रति टन है तो इस जीवाश्म ईंधन के उपयोगकर्ता को 500 रुपये की अतिरिक्त लागत का भुगतान करना पड़ेगा। इस तरह से कार्बन की कीमत तय करने से जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल खर्चीला हो जाता है, जो अंत में इसके उपयोग को हतोत्साहित करता है।

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खेती-किसानी भारत की अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार, धान की खेती का मोह छोड़ें किसान

खेती-किसानी भारत की अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार है। इस पर ज्यादा पानी खर्च होना स्वाभाविक है, लेकिन हमें यदि खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना है तो जल सुरक्षा की बात भी करनी होगी। दक्षिणी या पूर्वी भारत में अच्छी बरसात होती है। सो पारंपरिक रूप से वहीं धान की खेती होती थी और वहीं के लोगों का मूल भोजन चावल था। पंजाब-हरियाणा आदि इलाकों में नदियों का जाल रहा है। वहां की जमीन में नमी रहती थी। सो चना, गेहूं, राजमा जैसी फसलें यहां होती थीं। दुर्भाग्य है कि देश की कृषि नीति ने महज अधिक लाभ कमाने का सपना दिखाया और ऐसे स्थानों पर भी धान की अंधाधुध खेती शुरू हो गई, जहां इसके लायक पानी उपलब्ध नहीं था।

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Azadi Ka Amrit Mahotsav : अंग्रेजी हुकूमत को चोट पर चोट पहुंचाते रहे जेपी, धोती की रस्सी बना लांघ गए जेल

आजादी की जंग में जिले के क्रांतिकारियों के एक से बढ़कर एक किरदार रहे हैं। 1857 में बलिया के मंगल पांडेय ने अंग्रेज अफसर पर पहली गोली दाग बगावत की शुरुआत की। 1942 की अगस्त क्रांति में नौ अगस्त से तो जिले के कोने-कोने में क्रांति का ज्वाला भड़क उठी थी। चित्तू पांडेय ने जिले को आजाद घोषित किया। इस कड़ी में एक नाम सिताबदियारा के लोकनायक जयप्रकाश नारायण का भी है। देश में अमूमन उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के विरोध के लिए जाना जाता है, लेकिन आजादी की जंग में भी उनके किरदार और भी गौरवान्वित करने वाले हैं।

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Sawan 2022: शिवलिंग ऊंचे टीले पर था स्थित, इसीलिए हो गए टीलेश्वर महादेव, जानें कानपुर के इस मंदिर का रहस्य

शास्त्री नगर का टीलेश्वर महादेव मंदिर श्रावण मास में भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहता है। यहां महादेव के साथ कई देवी-देवताओं के दर्शन भक्तों को होते हैं। श्रावण मास और महाशिवरात्रि में शृंगार के बाद महादेव की शोभायात्रा निकाली जाती है। शहर के साथ आस-पास के जिलों से भक्त जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। महादेव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

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