यूपी चुनाव 2022: विकास के लिए बसपा प्रमुख मायावती के साथ आए 10 राजनीतिक दल, समर्थन का किया ऐलान

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अकेले दम पर मैदान में उतरी बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंगलवार को 10 राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीशचंद्र मिश्र से मिलकर समर्थन करने का ऐलान किया है। नेताओं ने मिश्र से कहा कि दस साल से प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त है। भुखमरी, बेरोजगारी से लोग परेशान हैं। लोकतंत्र की रक्षा-सुरक्षा व न्याय के लिए वे विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के साथ हैं।

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अब वायु ही नहीं ध्वनि प्रदूषण भी कर रहा बीमार, रोकथाम के मानक और प्रविधान तय, लेकिन कोई एक्शन प्लान नहीं

वायु प्रदूषण के बाद ध्वनि प्रदूषण भी देश के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है, लेकिन इसकी रोकथाम को लेकर सभी स्तरों पर लापरवाही देखी जा रही है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अधीन सीएसआइ आर-एनपीएल (काउंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्टि्रयल रिसर्च- नेशनल फिजिकल लेबोरेट्री) द्वारा हाल ही में ध्वनि प्रदूषण पर रखी गई अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में भी इस पर चिंता जताई गई। कार्यशाला में सामने आया कि खासतौर पर महानगरों में ध्वनि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसकी निगरानी भर हो रही है। रोकथाम के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे।

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बजट बिगुल: 'त्रिशंकु' बने हजारों कस्बों में स्लम जैसा जीवन बसर कर रहे लोग, शहरी निकाय से वास्ता नहीं और ग्राम पंचायतें पूछती नहीं

न गांव का सुख है और न ही शहर की सहूलियत। शहरीकरण की अंधी दौड़ में कुछ यूं फंसे कि त्रिशंकु ने कस्बों में फंस गए हैं। गांव से निकल कर कस्बों व बाजार में बसी जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। उसे न तो गांव जैसी साधारण सुविधा मिल पा रही है और न ही शहरों जैसी सहूलियतें। स्लम जैसे हालत में गुजर बसर कर रहे ऐसे लोगों की मुश्किलें और चुनौतियां दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। आम जीवन के लिए जिन मूलभूत सुविधाओं की जरूरत होती है उन्हें यहां नसीब नहीं हो रही हैं। गांवों और शहरों के बीच त्रिशंकु बनी ऐसी बड़ी आबादी के लिए आगामी वित्त वर्ष 2022-23 के आम बजट में कुछ बड़ी राहत की घोषणा की उम्मीद है।

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आदिवासी महिलाओं के आत्मनिर्भर होने की कहानी सुकून देगी, मप्र के श्योपुर में खोला भोजनालय

आदिवासी महिलाओं के आत्मनिर्भर होने की यह कहानी सुकून देती है। मध्य प्रदेश के आदिवासी जिला श्योपुर में महिलाओं के संगठन द्वारा शुरू किया गया स्थानीय व्यंजनों का रेस्टोरेंट खूब चल रहा है। महज चार माह पहले महिलाओं द्वारा एएम-प्रसादम (भोजन एवं रेस्टोरेंट) का संचालन शुरूकिया गया था। रेस्टोरेंट को स्वसहायता समूह की नौ महिलाएं मिलकर चला रही हैं। समूह की महिलाओं द्वारा आदिवासी व्यंजनों के साथ समोसा, कचौरी, इमरती, बेड़ई, जलेबी, दाल-बाफले, लड्डू-बाटी, मक्का, ज्वार, बाजरे की रोटी, दाल-पनिया के अलावा राजस्थानी खाना भी परोसा जाता है।

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यूपी चुनाव 2022: सलाखों के भीतर से दबंग भी कर रहे चुनाव लड़ने की तैयारी, जानिए कब से शुरू हुआ था यह सिलसिला

अब्दुल्ला आजम के जेल से छूटकर रामपुर में सक्रिय होते ही इन चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया कि सीतापुर की जेल में बंद उनके पिता पूर्व मंत्री आजम खां जेल से ही चुनाव लड़ेंगे। हालांकि यह कोई पहला अवसर नहीं है जब कोई सलाखों के पीछे से चुनाव लड़ेगा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों से दबंगों का दखल है। इस चुनाव में भी कई ऐसे चेहरे होंगे, जो जेल के पीछे रहकर न सिर्फ अपना दावा पेश करेंगे, बल्कि अपनों के लिए पूरी जोर आजमाइश भी करेंगे।

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यूपी चुनाव 2022: युवाओं का जोश उड़ाएगा धुरंधरों का होश, 40 वर्ष तक की आयु वाले तकरीबन 50 प्रतिशत मतदाता

बड़ी-बड़ी बातें करने वाली राजनीतिक पार्टियां युवाओं को चुनावी मैदान में उतारने में भले ही उदासीनता दिखाएं, लेकिन अबकी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं का जोश, बड़े-बड़ों का होश उड़ा सकता है। युवा मतदाताओं में मतदान के प्रति बढ़ती जागरुकता निश्चित तौर पर सूबे की कई विधानसभा सीटों पर हार-जीत का फैसला करेगी। युवा मतदाताओं का जोश किसी भी राजनीतिक पार्टी के चुनावी नतीजे में अप्रत्याशित तौर पर बड़ा उलटफेर कर सकता है।

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भदोही में अक्टूबर में लगेगा अंतरराष्ट्रीय कार्पेट फेयर, आगरा में सीईपीसी की बैठक में लगी मुहर

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) ने भदोही के कार्पेट एक्सपो मार्ट में अक्टूबर में अंतरराष्ट्रीय कार्पेट मेले को हरी झंडी दे दी है। परिषद की सोमवार को आगरा में हुई बैठक में यह सहमति बनी है। 14 से 17 अक्टूबर इसकी तारीख फाइनल हुई है। मेले में विदेश की कालीन कंपनियाें के अलावा देश के सभी निर्यातक हिस्सा लेंगे। वहीं मार्च में दिल्ली में प्रस्तावित इंडिया कारपेट एक्सपो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा।

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पैरेंट्स के लिए खास सलाह, बच्चों में क्या हैं कोरोना के लक्षण, सामान्य फ्लू में कैसे करें देखभाल

कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच मौसम की मार का असर सबसे ज्यादा बच्चों पर हो रहा है। टीकाकरण नहीं होने से एक ओर जहां बच्चों पर कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है वहीं, मौसमजनित बीमारियां भी इन्हें अपना शिकार बना रही हैं। एलएलआर अस्पताल में बाल रोग विभाग के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. मनीष यादव बताते हैं कि संक्रमण और वायरल के लक्षण लगभग समान होने से बच्चों को सुरक्षित रखना अभिभावकों के लिए चुनौती है। ऐसे में कम उम्र के बच्चों को घरों में सुरक्षित रखने का प्रयास करें। बाहरी संपर्क से बचाएं और गर्म कपड़े पहनाकर रखें। सर्दी, खांसी, जुकाम, उल्टी, दस्त और हरारत संक्रमण के शुरुआती लक्षण होते हैं जो मौसम बदलाव के कारण वायरल में भी देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि अचानक सर्दी बढऩे से ओपीडी में निमोनिया से जुड़े मामले बढ़ रहे हैं।

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अगर आप रीढ़ की हड्डी के दर्द से हैं परेशान तो जानें कैसे मिलेगा आराम

शरीर का हर अंग महत्वपूर्ण है और सबका अपना काम है। कुछ शारीरिक समस्याएं उम्र जनित होती हैं, जबकि कुछ ऐसी होती हैं, जिसका शिकार किसी भी उम्र के लोग हो सकते हैं, जैसे रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं कई कारणों से हो सकती हैं। इसमें किसी दुर्घटना में वर्टिब्रल हड्डी की क्षति, रीढ़ में चोट लगना, रीढ़ की हड्डी की टीबी और आस्टियोपोरोसिस आदि शामिल हैं।

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कोरोना काल में स्क्रीन बिगाड़ रही आंखों की सेहत, ध्‍यान रखें ये 7 बातें

विभिन्न प्रकार के गैजेट्स हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं। बीते दो साल में कोरोना संक्रमण के चलते इनका प्रयोग और अधिक बढ़ गया है। आफिस कार्य, मनोरंजन, एजुकेशन आदि सब कुछ गैजेट्स पर निर्भर हो रहा है। बच्चों का ज्यादा से ज्यादा समय इन पर बीत रहा है।

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